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Ashwagandha Powder: (अश्वगंधा)

Health Benefits of Ashwagandha or Powder: Due to the poor quality of clinical research, ashwagandha benefits have not been proven yet. The root powder has been used for centuries in India, in ayurvedic medicine, but there is no high-quality evidence of its benefits. The traditional medicine offers several benefits that include the following.

Commonly known as ashwagandha in India, it is also called poison gooseberry and winter cherry, and it belongs to the Solanaceae family or the nightshade family. Ashwagandha is a combination of two different Sanskrit words, ‘Ashwa’ meaning horse and ‘Gandha’ which means smell. The combination of the two words reflects that the herb has a strong horse-like odour. Its biological species name is Withania Somnifera, and Somnifera means ‘sleep-inducing’ in Latin. Ashwagandha is known to aid in getting a good night’s sleep.
An evergreen shrub that grows in India, the Middle East and some parts of Africa, Ashwagandha is considered the most important herb in the Ayurvedic medicine system. The Ayurvedic medicine system started more than three thousand years ago, and ashwagandha has been a part of the system since then. Widely known as ‘Rasayana,’ it is believed to help you maintain your youth physically and mentally. Historically, the roots of this herb are used to treat several ailments like stress, anxiety, constipation, insomnia, among others. It is not just the roots, even the leaves, seeds and fruits are used for various treatments.

आपने कई बार अश्वगंधा का नाम सुना होगा। अखबारों या टीवी में अश्वगंधा के विज्ञापन आदि भी देखे होंगे। आप सोचते होंगे कि अश्वगंधा क्या है या अश्वगंधा के गुण क्या है? दरअसल अश्वगंधा एक जड़ी-बूटी है। अश्वगंधा का प्रयोग कई रोगों में किया जाता है। क्‍या आप जानते हैं कि मोटापा घटाने, बल और वीर्य विकार को ठीक करने के लिए अश्वगंधा का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा अश्वगंधा के फायदे और भी हैं। अश्वगंधा के अनगिनत फायदों के अलावा अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से अश्वगंधा के नुकसान से सेहत के लिए असुविधा उत्पन्न हो सकता है। अश्‍वगंधा के कुछ खास औषधीय गुणों के कारण यह बहुत तेजी से प्रचलित हुआ है। आइए आपको बताते हैं आप अश्वगंधा का प्रयोग किन-किन बीमारियों में और कैसे कर सकते हैं।
अलग-अलग देशों में अश्‍वगंधा कई प्रकार की होती है, लेकिन असली अश्वगंधा की पहचान करने के लिए इसके पौधों को मसलने पर घोड़े के पेशाब जैसी गंध आती है। अश्वगंधा की ताजी जड़ में यह गंध अधिक तेज होती है। वन में पाए जाने वाले पौधों की तुलना में खेती के माध्‍यम से उगाए जाने वाले अश्‍वगंधा की गुणवत्‍ता अच्‍छी होती है। तेल निकालने के लिए वनों में पाया जाने वाला अश्‍वगंधा का पौधा ही अच्‍छा माना जाता है।

अश्‍वगंधा के फायदे - Ashwagandha Benefits and Uses in Hindi

1. गले के रोग (गलगंड) में अश्वगंधा के पत्ते के फायदे
श्वगंधा के फायदे के कारण और औषधीय गुणों के वजह से अश्वगंधा गले के रोग में लाभकारी सिद्ध होता है। अश्‍वगंधा पाउडर (ashwagandha powder benefits) तथा पुराने गुड़ को बराबार मात्रा में मिलाकर 1/2-1 ग्राम की वटी बना लें। इसे सुबह-सुबह बासी जल के साथ सेवन करें। अश्‍वगंधा के पत्‍ते का पेस्‍ट तैयार करें। इसका गण्डमाला पर लेप करें। इससे गलगंड में लाभ होता है।

2. टीबी रोग में अश्वगंधा चूर्ण के उपयोग
अश्‍वगंधा चूर्ण की 2 ग्राम मात्रा को असगंधा के ही 20 मिलीग्राम काढ़े के साथ सेवन करें। इससे टीबी में लाभ होता है। अश्‍वगंधा की जड़ से चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की 2 ग्राम लें और इसमें 1 ग्राम बड़ी पीपल का चूर्ण, 5 ग्राम घी और 5 ग्राम शहद मिला लें। इसका सेवन करने से टीबी (क्षय रोग) में लाभ होता है। अश्वगंधा के फायदे (ashwagandha benefits in hindi) टीबी के लिए उपचारस्वरुप

3. अश्वगंधा के इस्तेमाल से खांसी का इलाज
असगंधा की 10 ग्राम जड़ों को कूट लें। इसमें 10 ग्राम मिश्री मिलाकर 400 मिलीग्राम पानी में पकाएं। जब इसका आठवां हिस्सा रह जाए तो आंच बंद कर दें। इसे थोड़ा-थोड़ा पिलाने से कुकुर खांसी या वात से होने वाले कफ की समस्या में विशेष लाभ होता है।
असगंधा के पत्तों से तैयार 40 मिलीग्राम गाढ़ा काढ़ा लें। इसमें 20 ग्राम बहेड़े का चूर्ण, 10 ग्राम कत्था चूर्ण, 5 ग्राम काली मिर्च तथा ढाई ग्राम सैंधा नमक मिला लें। इसकी 500 मिलीग्राम की गोलियां बना लें। इन गोलियों को चूसने से सब प्रकार की खांसी दूर होती है। टीबी के कारण से होने वाली खांसी में भी यह विशेष लाभदायक है। अश्वगंधा के फायदे खांसी से आराम दिलाने में उपचारस्वरुप काम करता है।

4. छाती के दर्द में अश्वगंधा के लाभ
अश्‍वगंधा की जड़ का चूर्ण 2 ग्राम की मात्रा का जल के साथ सेवन करें। इससे सीने के दर्द में लाभ (ashwagandha powder benefits) होता है।

5. गर्भधारण करने में अश्‍वगंधा के प्रयोग से लाभ
20 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण को एक लीटर पानी तथा 250 मिलीग्राम गाय के दूध में मिला लें। इसे कम आंच पर पकाएं। जब इसमें केवल दूध बचा रह जाय तब इसमें 6 ग्राम मिश्री और 6 ग्राम गाय का घी मिला लें। इस व्‍यंजन का मासिक धर्म के शुद्धिस्नान के तीन दिन बाद, तीन दिन तक सेवन करने से यह गर्भधारण में सहायक (ashwagandha ke fayde) होता है।
अश्वगंधा चूर्ण के फायदे गर्भधारण की समस्या में भी मिलते हैं। अश्वगंधा पाउडर को गाय के घी में मिला लें। मासिक-धर्म स्‍नान के बाद हर दिन गाय के दूध के साथ या ताजे पानी से 4-6 ग्राम की मात्रा में इसका सेवन लगातार एक माह तक करें। यह गर्भधारण में सहायक होता है।
असगंधा और सफेद कटेरी की जड़ लें। इन दोनों के 10-10 मिलीग्राम रस का पहले महीने से पांच महीने तक की गर्भवती स्त्रियों को सेवन करने से अकाल में गर्भपात नहीं होता है।

6. ल्यूकोरिया के इलाज में अश्‍वगंधा से फायदा
2-4 ग्राम असगंधा की जड़ के चूर्ण (ashwagandha powder benefits) में मिश्री मिला लें। इसे गाय के दूध के साथ सुबह और शाम सेवन करने से ल्यूकोरिया में लाभ होता है।
अश्‍वगंधा, तिल, उड़द, गुड़ तथा घी को समान मात्रा में लें। इसे लड्डू बनाकर खिलाने से भी ल्यूकोरिया में फायदा होता है।

7. एइंद्रिय दुर्बलता (लिंग की कमजोरी) दूर करता है अश्‍वगंधा का प्रयोग
असगंधा के चूर्ण को कपड़े से छान कर (कपड़छन चूर्ण) उसमें उतनी ही मात्रा में खांड मिलाकर रख लें। एक चम्मच की मात्रा में लेकर गाय के ताजे दूध के साथ सुबह में भोजन से तीन घंटे पहले सेवन करें।
रात के समय अश्‍वगंधा की जड़े के बारीक चूर्ण को चमेली के तेल में अच्छी तरह से घोंटकर लिंग में लगाने से लिंग की कमजोरी या शिथिलता (ashwagandha ke fayde) दूर होती है।
असगंधा, दालचीनी और कूठ को बराबर मात्रा में मिलाकर कूटकर छान लें। इसे गाय के मक्खन में मिलाकर सुबह और शाम शिश्‍न (लिंग) के आगे का भाग छोड़कर शेष लिंग पर लगाएं। थोड़ी देर बाद लिंग को गुनगुने पानी से धो लें। इससे लिंग की कमजोरी या शिथिलता दूर होती है।

8.अश्‍वगंधा के प्रयोग से त्‍वचा रोग का इलाज
अश्‍वगंधा के पत्‍तों का पेस्‍ट तैयार लें। इसका लेप या पत्‍तों के काढ़े से धोने से त्वचा में लगने वाले कीड़े ठीक होते है। इससे मधुमेह से होने वाले घाव तथा अन्‍य प्रकार के घावों का इलाज होता है। यह सूजन को दूर करने में लाभप्रद होता है।
अश्‍वगंधा की जड़ को पीसकर, गुनगुना करके लेप करने से विसर्प रोग की समस्‍या में लाभ (ashwagandha ke fayde) होता है।

9. कोलेस्ट्रॉल कम करने में होता है मददगार
अश्वगंधा का सेवन करने से दिल संबंधित बीमारियों का खतरा कम हो जाता है क्योंकि इसमें पाए जाने वाले एंटीआक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होते हैं। इसका सेवन से दिल की मांसपेशियां मजबूत होती है और बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है।

10. नींद ना आने की समस्या को करता है दूर
यदि में रात में सोते समय बिस्तर पर करवट बदलते रहते हैं इसका मतलब है कि आपको अच्छी नींद नहीं आती है। ऐसे में अश्वगंधा का सेवन इस समस्या के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं. एक अध्ययन के मुताबिक बताया गया है कि अश्वगंधा की पत्तियों में ट्राइथिलीन ग्लाइकोल नाम का यौगिक मौजूद होता है, जो पर्याप्त और सुकून भरी नींद लेने में सहयोग करता है।

11. लिवर रोगों से करता है बचाव
अश्वगंधा में पाए जाने वाले एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण लिवर में होने वाली सूजन की समस्या दूर करने में सहायक होता है। यह सूजन कम करता है। अगर रात में सोने से पहले दूध के साथ इसका सेवन किया जाए तो काफी फायदेमंद होगा. यह फैटी लिवर की समस्या को भी कम करता है। इसका सेवन करने से लिवर को हानिकारक टॉक्सिन्स के बुरे असर से बचाव करता है और लिवर को डिटॉक्स भी करता है।

12. कैंसर से करता है बचाव
अश्वगंधा का इस्तेमाल कई बीमारियों के लिए किया जाता है। इसमें खतरनाक और नाम सुनते ही रूह कांप जाने वाली कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी भी शामिल हैं. अश्वगंधा का सेवन करने से इस घातक बीमारी से भी बचा जा सकता हैं. इसमें मौजूद एंटी-ट्यूमर गुण वैकल्पिक उपचार के लिए काफी अच्छा माना जाता है।

13. डायबिटीज के खतरे को करता है कम
आज लोग डायबिटीज से धीरे-धीरे ग्रसित होते जा रहे हैं. यह एक ऐसी बीमारी है, जिसका इलाज सिर्फ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी से संभव हो सकता है। अश्वगंधा के सेवन करने से डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है।

14. इंद्रिय दुर्बलता (लिंग की कमजोरी) दूर करता है अश्‍वगंधा का प्रयोग
असगंधा के चूर्ण को कपड़े से छान कर (कपड़छन चूर्ण) उसमें उतनी ही मात्रा में खांड मिलाकर रख लें। एक चम्मच की मात्रा में लेकर गाय के ताजे दूध के साथ सुबह में भोजन से तीन घंटे पहले सेवन करें।
रात के समय अश्‍वगंधा की जड़े के बारीक चूर्ण को चमेली के तेल में अच्छी तरह से घोंटकर लिंग में लगाने से लिंग की कमजोरी या शिथिलता (ashwagandha ke fayde) दूर होती है।
असगंधा, दालचीनी और कूठ को बराबर मात्रा में मिलाकर कूटकर छान लें। इसे गाय के मक्खन में मिलाकर सुबह और शाम शिश्‍न (लिंग) के आगे का भाग छोड़कर शेष लिंग पर लगाएं। थोड़ी देर बाद लिंग को गुनगुने पानी से धो लें। इससे लिंग की कमजोरी या शिथिलता दूर होती है।

15. चोट लगने पर करें अश्‍वगंधा का सेवन
अश्वगंधा पाउडर में गुड़ या घी मिला लें। इसे दूध के साथ सेवन करने से शस्‍त्र के चोट से होने वाले दर्द में आराम मिलता है।

अश्वगंधा से नुकसान - Ashwagandha Side Effects

1. गर्म प्रकृति वाले व्‍यक्ति के लिए अश्‍वगंधा का प्रयोग नुकसानदेह होता है।
अश्‍वगंधा के नुकसानदेह प्रभाव को गोंद, कतीरा एवं घी के सेवन से ठीक किया जाता है।

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